Welcome Visitor || Adhivakta Pension Vikas Samiti

Thanks a lot for all your kind support & blessings...!!!
Showing posts with label Anup Kumar Srivastav. Show all posts
Showing posts with label Anup Kumar Srivastav. Show all posts

Thursday, 14 August 2014

स्वतंत्रता दिवस - 2014 की हार्दिक शुभकामनाएं

सभी सम्मानित भारत वंशियो को, अधिवक्ताओं को 
और इस ब्लॉग के सुधी पाठकों को 
स्वतंत्रता दिवस - 2014 की हार्दिक शुभकामनाएं
कृपया हमारे भारत की सबसे बड़ी बीमारी "भ्रष्टाचार" को 

खत्म करने का प्रयास करे, 
 ताकि भारत दुनिया का सबसे अच्छा मुल्क बन सके।
!! जय भारत प्रेम !!

Saturday, 14 December 2013

सूचना || अपील :- मताधिकार का प्रयोग अवश्य करे

श्री अशोक कुमार पाण्डेय (अधिवक्ता)
 ~ * ~
हमारी समिति के संस्थापक व संयोजक श्री अशोक कुमार पाण्डेय (अधिवक्ता) आगामी दी बनारस बार एसोसिएशन, वाराणसी (बी.बी.ए.) के वार्षिक चुनाव वर्ष - 2014 में वरिष्ठ उपाध्यक्ष (20 वर्ष से अधिक की वकालत) पद पर अपनी उम्मीदवारी आप सब के सम्मुख रख चुके हैं...!

        आप समस्त सम्मानित अधिवक्ता बंधु उनके द्वारा अधिवक्ता कल्याण/हित के लिए किये गए कार्यो से संतुष्ट हो तो सोच-समझकर कर अपने मताधिकार का उपयोग करते हुए श्री अशोक कुमार पाण्डेय (अधिवक्ता) को उक्त चुनाव में विजयी बनाने का कष्ट करें

सधन्यवाद् 

निवेदक - समस्त सदस्यगण व पदाधिकारीगण
~ * ~
मतदान दिनांक 17-12-2013 को है, 
आप सभी अधिवक्ताओं से निवेदन है कि अपने मताधिकार का प्रयोग अवश्य करे
यह राष्ट्र व अधिवक्ता हित में अतिआवश्यक है।

Tuesday, 3 December 2013

Happy Advocates' Day || अधिवक्ता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ.....

अधिवक्ता दिवस की हार्दिक शुभकामनाएँ। आज के शुभ अवसर पर हमारी समिति स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति “भारत रत्न” डॉ.राजेन्द्र प्रसाद को शत: शत नमन करती है |

स्वतंत्र भारत के पहले राष्ट्रपति डॉ.राजेन्द्र प्रसाद का जीवन-परिचय:- 26 जनवरी, 1950 को जब भारत को संविधान के रूप में एक गणतंत्र राष्ट्र का दर्जा दिया गया उसी दिन डॉ. राजेन्द्र प्रसाद के रूप में स्वतंत्र भारत को पहला राष्ट्रपति भी प्राप्त हुआ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म 3 दिसंबर, 1884 को बिहार के एक छोटे से गांव जीरादेई में हुआ था. यह वो समय था जब धर्म के नाम पर भेदभाव जैसी व्यवस्थाएं समाज से पूरी तरह विलुप्त थीं. राजेंद्र जी के भी कई सारे मित्र मुसलमान थे जो उनके साथ मिलकर होली खेलते थे और हिन्दू मुहर्रम वाले दिन ताजिए निकालते थे. एक बड़े संयुक्त परिवार के सबसे छोटे सदस्य होने के कारण इनका बचपन बहुत प्यार और दुलार से बीता. संयुक्त परिवार होने के कारण पारिवारिक सदस्यों के आपसी संबंध बेहद मधुर और गहरे थे. इनके पिता का नाम महादेव सहाय था. डॉ राजेंद्र प्रसाद की प्रारंभिक शिक्षा उन्हीं के गांव जीरादेई में हुई. उस समय यह रिवाज था कि शिक्षा का आरंभ फारसी भाषा से ही किया जाएगा. इसीलिए राजेंद्र प्रसाद और उनके चचेरे भाइयों को पढ़ाने एक मौलवी आते थे. पढ़ाई की तरफ इनका रुझान बचपन से ही था. बाल-विवाह की परंपरा का अनुसरण करते हुए मात्र 12 वर्ष की आयु में इनका विवाह राजवंशी देवी से संपन्न हुआ. राजेंद्र प्रसाद ने अपने लगातार खराब रहने वाले स्वास्थ्य क असर अपनी पढ़ाई पर नहीं पड़ने दिया. आगे की पढ़ाई के लिए उन्होंने कलकत्ता विश्विद्यालय की प्रवेश परीक्षा में पहला स्थान प्राप्त किया. उन्हें 30 रूपए महीने की छात्रवृत्ति भी प्रदान की गई. जीरादेई गांव से पहली बार किसी युवक ने कलकत्ता विश्विद्यालय में प्रवेश पाने में सफलता प्राप्त की थी जो निश्चित ही राजेंद्र प्रसाद और उनके परिवार के लिए गर्व की बात थी. सन 1902 में उन्होंने कलकत्ता प्रेसिडेंसी कॉलेज में प्रवेश लिया. सन 1915 में कानून में मास्टर की डिग्री में विशिष्टता पाने के लिए राजेन्द्र प्रसाद को सोने का मेडल मिला. इसके बाद उन्होंने कानून में डॉक्टरेट की उपाधि भी प्राप्त की.

डॉ. राजेंद्र प्रसाद का व्यक्तित्व
डॉ. राजेन्द्र प्रसाद का जन्म उस काल में हुआ जब ब्रिटिश साम्राज्यवाद पूरी तरह अपने पांव पसार चुका था. खाने-पीने, कपड़े पहनने से लेकर लगभग हर क्षेत्र में ब्रिटिश छाप महसूस की जा सकती थी. लेकिन राजेंद्र प्रसाद परंपरा के अनुसार हमेशा धोती-कुर्ता और सर पर टोपी पहनते थे. वह एक विद्वान और प्रतिभाशाली पुरुष थे. संयुक्त परिवार में सबसे छोटे होने के कारण राजेंद्र प्रसाद का बचपन बहुत दुलार से बीता था. वह एक दृढ़ निश्चयी और उदार दृष्टिकोण वाले व्यक्ति थे. कायस्थ परिवार से संबंधित होने के कारण राजेंद्र प्रसाद थोड़े रूढिवादी विचारधारा वाले थे. उन्होंने स्वयं स्वीकार किया था कि वह ब्राह्मण के अलावा किसी और का छुआ भोजन तक नहीं खाते थे. उन्होंने अपना यह व्यवहार गांधी जी के संपर्क में आने के बाद छोड़ा था.
राजेंद्र प्रसाद की विशिष्ट उपलब्धियां
  • डॉ राजेन्द्र प्रसाद भारत के एकमात्र राष्ट्रपति थे, जिन्होंने लगातार दो बार राष्ट्रपति का पद प्राप्त किया.
  • राष्ट्रपति के पद पर रहते हुए राजेन्द्र प्रसाद ने सद्भावना के उद्देश्य से कई देशों की यात्राएं भी कीं. उन्होंने इस आण्विक युग में शांति बनाए रखने की आवश्यकता पर ज़ोर दिया.
राजेंद्र प्रसाद को दिए गए सम्मान
सन 1962 में अपने राजनैतिक और सामाजिक योगदान के लिए उन्हें भारत के सर्वश्रेष्ठ नागरिक सम्मान “भारत रत्न” से नवाजा गया.

राजेन्द्र प्रसाद का निधन
राजनीति से सन्यास लेने के बाद राजेन्द्र प्रसाद ने अपना जीवन पटना के निकट एक आश्रम में बिताया जहां 28 फरवरी, 1963 को उनका निधन हो गया.

Sunday, 31 March 2013

मुख्यमंत्री के द्वारा अधिवक्ता कल्याण की घोषनाओ का स्वागत :-

 अधिवक्ता पेंशन विकास समिति के द्वारा अधिवक्ता हित में की गयी मांगों पर मुख्यमंत्री ने सहमति जताते हुए, विचार करने का आश्वासन दिया है।
अधिवक्ता पेंशन विकास समिति, माननीय मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी  को कोटिश: धन्यवाद ज्ञापित करते हुए, उनके द्वारा की गयी घोषनाओ का स्वागत करती है। 
और उनकी अधिवक्ता समाज के कल्याण की नेक भावना की भूरी-भूरी प्रशंसा करती है।


Friday, 31 August 2012

वाराणसी के अधिवक्ता मुख्यमंत्री को भेजेंगे उनके वादों को पूरा करने का मांग पत्र :-

प्रस्ताव :- "उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिवक्ताओं से किये गये पाँचों वादों को पूरा करने के लिए" पर आहूत की गयी बैठक तिथि 28-08-2012 व 31-08-2012 सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया। 

आज तिथि 31-08-2012 को स्थगित बैठक 28-08-2012 की कार्यवाही पुन: शुरू किया गया और सर्वप्रथम प्रस्तावक श्री अंशुमान दुबे ने तिथि 28-08-2012 की बैठक के विषय में सदस्यों को बताया। ततपश्चात सम्मानित अधिवक्ता बंधुओं क्रमश: श्री मान बहादुर सिंह, श्री हरीशंकर पाठक, श्री अशोक कुमार सिंह, श्री श्रीनिवास मिश्र, श्री राम मूरत सिंह यादव, श्री निसार अहमद, श्री राम राजीव सिंह, श्री सत्य नारायण द्विवेदी आदि ने अपने विचार सदन के पटल पर रखे। बैठक के अंत में प्रस्तावकगण ने सदस्यओं के विचार व संशोधन को स्वीकार करते हुए संशोधित प्रस्ताव अध्यक्ष श्री अशोक सिंह 'दाढ़ी' व सदस्यओं के समक्ष रखा जिसे अध्यक्ष जी ने सहर्ष स्वीकार करते हुए पारित कर दिया। 

पारित प्रस्ताव की प्रेस विज्ञप्ति निम्न है:-



बैठक के छायाचित्र






Sunday, 19 August 2012

..और फाइलों में ही रह गया सुरक्षा प्लान.....विकास बागी वाराणसी

और फाइलों में ही रह गया सुरक्षा प्लान - विकास बागी वाराणसी:
आतंक का नग्न तांडव देख चुके पुलिस-प्रशासन को शायद अब भी किसी हादसे का इंतजार है। पुलिस की आलमारी में पांच साल से बंद फाइल तो कम से कम यही बता रही है। सुरक्षा के नाम पर दूसरी व्यवस्था की बात तो दूर, अब तक कचहरी क्षेत्र में एक अदद क्लोज सर्किट कैमरा भी नहीं लगाया जा सका है। कलेक्ट्रेट व कचहरी में 23 नवंबर 2007 को हुए आतंकी विस्फोट के बाद सुरक्षा- व्यवस्था के लिए एक फूलप्रूफ प्लान बनाया गया। काशीवासियों को भरोसा दिलाया गया कि अब ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। राजनेताओं की तरह पुलिस भी लोगों को वादों का झुनझुना व मीडिया को अपनी योजनाओं का पिटारा थमाकर रात गई, बात गई वाले अंदाज में चुप बैठ गई। सीओ ने बनाई थी योजना कचहरी में धमाके के बाद आला अफसरों ने सिक्योरिटी प्लान के लिए तत्कालीन सीओ संसार सिंह को कमान सौंपी। सुरक्षा बिंदुओं की बारीकी से जांच के बाद 4 दिसंबर 2007 को सीओ कैंट ने एसएसपी से लगायत पुलिस व प्रशासन के आला अफसरों को प्लान सौंपा। क्या थी योजना : सुरक्षा के लिहाज से कचहरी व कलेक्ट्रेट के 8 में से 4 गेट स्थाई रूप से बंद होने थे। यह जिला पंचायत, विकास भवन के बगल वाला, साइकिल स्टैंड के बगल से कचहरी जाने वाला और सैनिक कल्याण बोर्ड का गेट था। सीजेएम गेट व कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार को हाइड्रोलिक गेट बनाना और वहां एक एसआई, चार कांस्टेबिल, डेढ़ सेक्शन पीएसी व डीएफएमडी व स्पीड ब्रेकर बनना था। अफसर ने अपने प्लान में साफ लिखा कि संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों गेट के समीप कंट्रोल रूम बनाने के साथ एक्सरे मशीन लगाई जाए। कचहरी पुलिस चौकी व फास्ट ट्रैक कोर्ट वाले गेट से सिर्फ पैदल लोगों को आने-जाने दिया जाए। डीएफएमडी के साथ प्रत्येक गेट पर 1 एसआई, 4 पुरुष व 2 महिला कांस्टेबिल नियुक्त किए जाने की बात कही गई। कचहरी व कलेक्ट्रेट परिसर में चेकिंग के लिए सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के लिए लिखा। गोलघर चौराहा, सर्किट हाउस, विकास भवन के सामने, कचहरी व कलेक्ट्रेट परिसर में कुल 12 स्थानों पर क्लोज सर्किट कैमरा लगवाने की आवश्यकता जताई। परिसर में एक कंट्रोल रूम, बैरक, रेडियो संचार पुलिस व्यवस्था व कैंटीन खोला जाना था। परिसर के लिए अलग से बम व डाग स्क्वाएड की तैनाती के साथ चहारदीवारी को पांच फीट ऊंचा करने के बाद तीन फीट तक कंटीले तारों से घेरना था। शाम 6 से सुबह 9 बजे तक सभी प्रवेशद्वार बंद रखना था। आज के हालात, सब टांय-टांय फिस्स : कचहरी व कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा के लिहाज से यह फूलप्रूफ प्लान था। आला अफसरों ने पास भी कर दिया लेकिन आदतन कागजी घोड़ा दौड़ाने के बाद सभी जिम्मेदार लोग दफ्तरों में चुपचाप बैठ गए। अभी तक फाइल में दर्ज एक भी प्लान पर अमल नहीं हुआ। हाइड्रोलिक गेट लगा और न कोई कंट्रोल रूम स्थापित हुआ। चेकिंग का आलम यह है कि अधिकतर गेट पर लगे डीएफएमडी शोपीस के अलावा कुछ नहीं। सुरक्षाकर्मियों का ध्यान आने-जाने वालों पर कम बगल के ठेले वालों पर अधिक रहता है। दिन-रात परिसर के सभी गेट खुले रहते हैं। रात में जुआरी और शराबियों का मजमा रहता है लेकिन कोई पूछने वाला नहीं। ऐसे ही हालात में एक और 15 अगस्त आकर गुजर जाएगा, थोड़ी हलचल होगी और सब कुछ फिर शांत हो जाएगा।
Print on 14-08-2012, Varanasi Edition, Page No.4
Thanks to Shri Vikas Bagi, Varanasi and Dainik Jagran for this news. We're appreciate your efforts. 

Wednesday, 15 August 2012

स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...!!!


15th August :-Happy Independence Day...!!! 
१५ अगस्त :- स्वतंत्रता दिवस की हार्दिक शुभकामनायें...!!!  
"अधिवक्ता पेंशन विकास समिति" सभी सम्मानित सदस्यों एवं सभी सम्मानित अधिवक्ताओं और इस ब्लॉग के सुधी पाठकों को "स्वतंत्रता दिवस" की हार्दिक शुभकामनाएं देता है।

Thursday, 31 May 2012

निवेदन : उत्तर प्रदेश के सम्मानित अधिवक्ता बंधुओं से ( for Uttar Pradesh Advocate Welfare Fund Trustee Committee - Lucknow)

उत्तर प्रदेश के सम्मानित अधिवक्ता बंधुओं से
निवेदन
उत्तर प्रदेश के समस्त पंजीकृत अधिवक्ताओं से विनम्र निवेदन है कि, कृपया आप सभी "उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति, लखनऊ, उत्तर प्रदेश" के सदस्य बने | ताकि अधिवक्ता कल्याण योजनाओं को लागू करने के लिए उत्तर प्रदेश सरकार से मांग करने का अधिकार प्राप्त करने में अधिवक्ता हित के लिए प्रयासरत अधिवक्ता संघों की मदद हो सके|

अधिक जानकारी के लिए निम्न फ़ोन संख्या अथवा डाक पते पर संपर्क करने की कृपा करे :-
उत्तर प्रदेश अधिवक्ता कल्याण निधि न्यासी समिति,
कक्ष संख्या 24, बी ब्लाक, दारुलशफा, विधायक निवास, दारुलशफा,
लखनऊ - पिन कोड 226001, उत्तर प्रदेश
फ़ोन न. 0522-2625238


Extract of Magazine printed by Bar council of Uttar Pradesh, Allahabad with the heading of "Advocate Welfare Schemes & Relevant Forms"

 उत्तर प्रदेश में अधिवाक्तों की विभिन्न हितकारी योजानये (Advocate Welfare Schemes in Uttar Pradesh)

Application Form for Membership
U.P. Advocate Welfare Fund Trustee Committee
Lucknow, Uttar Pradesh

Please fill it and send it Lucknow with help of Local District Bar Association.
Thanks a Lot.
Please provide us your valuable support. 

Sunday, 20 May 2012

द्वितीय मांग-पत्र:- माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार

हमारे समिति ने तिथि 16-03-2012 को एक मांग-पत्र (मांग-पत्र:- माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार) माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को भेजा गया था। 
परन्तु दो माह से ज्यादा का समय व्यतीत हो जाने के पश्चात् माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा उक्त मांगो के सन्दर्भ में ना तो कोई घोषणा ही हुए और ना ही कोई लिखित आश्वसन ही मिला। 
अतः इन परिस्थितियों मैं समिति की बैठक तिथि 09-05-2012 में यह निर्णय लिया गया की माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार को पुन: एक मांग-पत्र भेजा जाइये और पूर्व की मांगों को पुनः उनके समक्ष रखा जाये।
पुनः मांग-पत्र को लिखने और भेजने का कार्य का.सचिव अंशुमान दुबे (अधिवक्ता) को दिया गया । पत्र का सम्पादन का कार्य का.सचिव अंशुमान दुबे द्वारा और अनुमोदन अध्यक्ष अनूप कुमार श्रीवास्तव (अधिवक्ता) द्वारा किया गया। टाइपिंग का कार्य मुकेश कुमार विश्वकर्मा (विधि छात्र) द्वारा किया गया।

द्वितीय मांग-पत्र:- माननीय मुख्यमंत्री उत्तर प्रदेश सरकार की सत्यप्रति सम्मानित सदस्यों व अधिवक्ताओं के अवलोकन हेतु उपलब्ध है :-


 
Web link of above letter of C.M.:-







 

Tuesday, 1 May 2012

Advocate Welfare Schemes in Uttar Pradesh :-

उत्तर प्रदेश में अधिवाक्तों की विभिन्न हितकारी योजानये (Advocate Welfare Schemes in Uttar Pradesh)



















राजद्रोह का अपराध क्या है?

Link:-
http://teesarakhamba.blogspot.com/2010/12/blog-post_28.html

Thnaks to तीसरा खंबा : राजद्रोह का अपराध क्या है?

Our Aim

Our Aim

The Times of India, Kapur : News on Advocate Pension Scheme

The Bihar State Bar Council Advocates' (Welfare) Pension Scheme, 2008