|| समृद्ध अधिवक्ता : समृद्ध समाज || By Adhivakta Pension Vikas Samiti, Varanasi
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Saturday, 8 September 2012
Saturday, 1 September 2012
Friday, 31 August 2012
वाराणसी के अधिवक्ता मुख्यमंत्री को भेजेंगे उनके वादों को पूरा करने का मांग पत्र :-
प्रस्ताव :- "उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा अधिवक्ताओं से किये गये पाँचों वादों को पूरा करने के लिए" पर आहूत की गयी बैठक तिथि 28-08-2012 व 31-08-2012 सर्वसम्मति से पारित कर दिया गया।
आज तिथि 31-08-2012 को स्थगित बैठक 28-08-2012 की कार्यवाही पुन: शुरू किया गया और सर्वप्रथम प्रस्तावक श्री अंशुमान दुबे ने तिथि 28-08-2012 की बैठक के विषय में सदस्यों को बताया। ततपश्चात सम्मानित अधिवक्ता बंधुओं क्रमश: श्री मान बहादुर सिंह, श्री हरीशंकर पाठक, श्री अशोक कुमार सिंह, श्री श्रीनिवास मिश्र, श्री राम मूरत सिंह यादव, श्री निसार अहमद, श्री राम राजीव सिंह, श्री सत्य नारायण द्विवेदी आदि ने अपने विचार सदन के पटल पर रखे। बैठक के अंत में प्रस्तावकगण ने सदस्यओं के विचार व संशोधन को स्वीकार करते हुए संशोधित प्रस्ताव अध्यक्ष श्री अशोक सिंह 'दाढ़ी' व सदस्यओं के समक्ष रखा जिसे अध्यक्ष जी ने सहर्ष स्वीकार करते हुए पारित कर दिया।
पारित प्रस्ताव की प्रेस विज्ञप्ति निम्न है:-
बैठक के छायाचित्र
Tuesday, 28 August 2012
समाजवादी पार्टी की उ. प्र. सरकार को उसके द्वारा किये गए वादों को याद दिलाने के लिए वाराणसी के अधिवक्ताओं की बैठक :-
आज तिथि 28-08-2012 को दी सेंट्रल बार एसोसिएशन 'बनारस' वाराणसी के सभागार में प्रस्तावक क्रमश: श्री अंशुमान दुबे, श्री अशोक कुमार पाण्डेय, श्री भानु स्वरुप लाल उर्फ़ कुंदन, श्री संजय कुमार श्रीवास्तव, श्रीमती प्रतिमा पाण्डेय पर आहूत की गयी। उक्त आमसभा बैठक की अध्यक्षता दी सेंट्रल बार एसोसिएशन 'बनारस' वाराणसी के अध्यक्ष श्री अशोक सिंह 'दाढ़ी' ने की और संचालन महामंत्री श्री गोपाल जी पाठक ने किया।
बैठक की शुरुआत प्रस्तावक श्री अंशुमान दुबे ने सरकार के प्रतिनिधियों द्वारा समय-समय पर दिए अनाधिकारिक वक्तव्यों के ऊपर सदन का ध्यान आकृष्ट कराया और सदन को यह भी बताया की RTI के अंतर्गत मांगे गए स्टाम्प बिक्री पिछले 6 वर्षों के और 47 जिलों के आकडे भी प्रस्तुत किये। जिसमें सरकार को कोर्ट स्टाम्प से 196 करोड़, गैर न्यायिक स्टाम्प से 17975 करोड़, अधिवक्ता कल्याण टिकट से 15 करोड़ तथा नोटरी टिकट से 52 करोड़ की आय हुई है।
अन्य अधिवक्ताओं ने भी प्रस्ताव के समर्थन में अपने विचार सदन के समक्ष रखे जिसमें मुख्य रूप से श्री इन्द्र पाल सिंह, श्री मुरलीधर सिंह, ओम शंकर श्रीवास्तव, श्री दशरथ प्रसाद, आदि थे।
बैठक में और भी वक्ताओं के विचार आने है, इसलिए आज की बैठक को तिथि 31-08-2012 के लिए स्थगित कर दिया गया है और बैठक पुन: तिथि 31-08-2012 दिन शुक्रवार को अपराहन 01:30 बजे आहूत की गयी है। उक्त व्यवस्था अध्यक्ष श्री अशोक सिंह 'दाढ़ी' ने बैठक में दी।
बैठक के छायाचित्र
Friday, 24 August 2012
समाजवादी पार्टी की उ. प्र. सरकार को उसके द्वारा किये गए वादों को याद दिलाने के लिए वाराणसी के अधिवक्ताओं का प्रस्ताव व बैठक :-
समाजवादी पार्टी की वर्त्तमान उत्तर प्रदेश सरकार को उसके द्वारा किये गए वादों को याद दिलाने के लिए वाराणसी के अधिवक्ताओं का प्रस्ताव, जिसपर तिथि 28-08-2012 को दी सेंट्रल बार एसोसिएशन 'बनारस' वाराणसी के सभागार में तिथि 28-08-2012, दिन मंगलवार, समय अपराहन 01:30 बजे बैठक आहूत की गयी है।
उक्त प्रस्ताव के सभी प्रस्तावक अधिवक्ता पेंशन विकास समिति के संस्थापक सदस्य क्रमश: श्री अशोक कुमार पाण्डेय (संयोजक), श्री भानु स्वरुप लाल उर्फ़ कुंदन (उपाध्यक्ष), श्री संजय कुमार श्रीवास्तव (प्रबंध समिति सदस्य व प्रचारक), श्री अंशुमान दुबे (वित्त सचिव/ क.सचिव), श्रीमती प्रतिमा पाण्डेय (प्रबंध समिति सदस्य व प्रचारक) थे और प्रस्ताव के समर्थन में तिथि 18-08-2012 से 23-08-2012 के मध्य 447 अधिवक्ताओं ने अपने हस्ताक्षर बनाये।
प्रस्ताव की प्रति और बैठक की सूचना निम्न है :-
समाजवादी पार्टी द्वारा किये गए वादों की प्रति निम्न है :-
उत्तर प्रदेश की वर्त्तमान सरकार के प्रथम बजट में अधिवक्ताओं के लिए प्रस्तावित राशि की प्रति निम्न है :-
Sunday, 19 August 2012
..और फाइलों में ही रह गया सुरक्षा प्लान.....विकास बागी वाराणसी
और फाइलों में ही रह गया सुरक्षा प्लान - विकास बागी वाराणसी:
आतंक का नग्न तांडव देख चुके पुलिस-प्रशासन को शायद अब भी किसी हादसे का इंतजार है। पुलिस की आलमारी में पांच साल से बंद फाइल तो कम से कम यही बता रही है। सुरक्षा के नाम पर दूसरी व्यवस्था की बात तो दूर, अब तक कचहरी क्षेत्र में एक अदद क्लोज सर्किट कैमरा भी नहीं लगाया जा सका है। कलेक्ट्रेट व कचहरी में 23 नवंबर 2007 को हुए आतंकी विस्फोट के बाद सुरक्षा- व्यवस्था के लिए एक फूलप्रूफ प्लान बनाया गया। काशीवासियों को भरोसा दिलाया गया कि अब ऐसी घटना दोबारा नहीं होगी। राजनेताओं की तरह पुलिस भी लोगों को वादों का झुनझुना व मीडिया को अपनी योजनाओं का पिटारा थमाकर रात गई, बात गई वाले अंदाज में चुप बैठ गई। सीओ ने बनाई थी योजना कचहरी में धमाके के बाद आला अफसरों ने सिक्योरिटी प्लान के लिए तत्कालीन सीओ संसार सिंह को कमान सौंपी। सुरक्षा बिंदुओं की बारीकी से जांच के बाद 4 दिसंबर 2007 को सीओ कैंट ने एसएसपी से लगायत पुलिस व प्रशासन के आला अफसरों को प्लान सौंपा। क्या थी योजना : सुरक्षा के लिहाज से कचहरी व कलेक्ट्रेट के 8 में से 4 गेट स्थाई रूप से बंद होने थे। यह जिला पंचायत, विकास भवन के बगल वाला, साइकिल स्टैंड के बगल से कचहरी जाने वाला और सैनिक कल्याण बोर्ड का गेट था। सीजेएम गेट व कलेक्ट्रेट के मुख्य द्वार को हाइड्रोलिक गेट बनाना और वहां एक एसआई, चार कांस्टेबिल, डेढ़ सेक्शन पीएसी व डीएफएमडी व स्पीड ब्रेकर बनना था। अफसर ने अपने प्लान में साफ लिखा कि संवेदनशीलता को देखते हुए दोनों गेट के समीप कंट्रोल रूम बनाने के साथ एक्सरे मशीन लगाई जाए। कचहरी पुलिस चौकी व फास्ट ट्रैक कोर्ट वाले गेट से सिर्फ पैदल लोगों को आने-जाने दिया जाए। डीएफएमडी के साथ प्रत्येक गेट पर 1 एसआई, 4 पुरुष व 2 महिला कांस्टेबिल नियुक्त किए जाने की बात कही गई। कचहरी व कलेक्ट्रेट परिसर में चेकिंग के लिए सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मियों की तैनाती के लिए लिखा। गोलघर चौराहा, सर्किट हाउस, विकास भवन के सामने, कचहरी व कलेक्ट्रेट परिसर में कुल 12 स्थानों पर क्लोज सर्किट कैमरा लगवाने की आवश्यकता जताई। परिसर में एक कंट्रोल रूम, बैरक, रेडियो संचार पुलिस व्यवस्था व कैंटीन खोला जाना था। परिसर के लिए अलग से बम व डाग स्क्वाएड की तैनाती के साथ चहारदीवारी को पांच फीट ऊंचा करने के बाद तीन फीट तक कंटीले तारों से घेरना था। शाम 6 से सुबह 9 बजे तक सभी प्रवेशद्वार बंद रखना था। आज के हालात, सब टांय-टांय फिस्स : कचहरी व कलेक्ट्रेट परिसर की सुरक्षा के लिहाज से यह फूलप्रूफ प्लान था। आला अफसरों ने पास भी कर दिया लेकिन आदतन कागजी घोड़ा दौड़ाने के बाद सभी जिम्मेदार लोग दफ्तरों में चुपचाप बैठ गए। अभी तक फाइल में दर्ज एक भी प्लान पर अमल नहीं हुआ। हाइड्रोलिक गेट लगा और न कोई कंट्रोल रूम स्थापित हुआ। चेकिंग का आलम यह है कि अधिकतर गेट पर लगे डीएफएमडी शोपीस के अलावा कुछ नहीं। सुरक्षाकर्मियों का ध्यान आने-जाने वालों पर कम बगल के ठेले वालों पर अधिक रहता है। दिन-रात परिसर के सभी गेट खुले रहते हैं। रात में जुआरी और शराबियों का मजमा रहता है लेकिन कोई पूछने वाला नहीं। ऐसे ही हालात में एक और 15 अगस्त आकर गुजर जाएगा, थोड़ी हलचल होगी और सब कुछ फिर शांत हो जाएगा।
Print on 14-08-2012, Varanasi Edition, Page No.4
Thanks to Shri Vikas Bagi, Varanasi and Dainik Jagran for this news. We're appreciate your efforts.
Wednesday, 15 August 2012
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